भारत एक सनातन राष्ट्र है,भारत राष्ट्र का आधार हिंदुत्व है – डॉ कृष्ण गोपाल जी 

भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ो से यह पता चलता है की पुरे भारत वर्ष में लगभग 31.5  करोड़ विद्यार्थी है  । इस युवा देश की इस धरोहर के निर्माण में संलग्न प्राध्यापक सही मायनो में देश के भविष्य के निर्माता है । इसी लक्ष्य को लेकर मालवा प्रान्त में लगातार दूसरे वर्ष एक तीन दिवसीय प्रांतीय प्राध्यापक नैपुण्य वर्ग दिनांक 5,6,7 अगस्त को इंदौर में संपन्न हुआ। वर्ग में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह-सर कार्यवाह डॉ कृष्णगोपाल जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ ।

भारत के शिक्षक का दायित्व बनता है की भारतीय आध्यात्मिक दृष्टि से विद्यार्थियों को परिचित कराये भारतीयों में अपार प्रतिभा है जिसका लोहा सारा विश्व मानता है पाश्चात्य जगत के शिक्षक और भारतीय शिक्षक में ये ही अंतर है की पाश्चात्य जगत में शिक्षक का विद्यार्थी से व्यावसायिक सम्बन्ध है भारी शुल्क लेकर वहाँ शिक्षक ज्ञान प्रदान करता है।  परंतु भारत में शिक्षक विद्यार्थी सम्बन्ध गुणात्मक है जिसमे मनुष्य तत्व गुण जगाने हेतु शिक्षक विद्यार्थियों को विश्व ज्ञान के साथ साथ संस्कार एवं आध्यात्मिक क्षमता तथा राष्ट्रीय दायित्व बोध प्रदान करता है ताकि विद्यार्थी का सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास हो आज शिक्षक को इसी दिशा में अपना ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। 

            उन्होंने भारत जीवन दर्शन और राष्ट्र की परिकल्पना पर अपने विचार रखते हुए कहा की  भारत एक सनातन राष्ट्र है इसको बनाना नहीं समझना है नेशन और राष्ट्र दोनों अलग अलग शब्द है अर्थात दोनों के नीतार्थ अलग अलग है।  1789 में फ़्रांस क्रांति हुई उसके बाद नेशनलिजम शब्द अस्तित्व में आया अन्यान्य देशो में इसकी अलग अलग परिभाषा है विश्व में कई नेशन भाषा,जाति, संप्रदाय आर्थिक आधार पर निर्मित हुए।  इसी नेशन शब्द को भारत के राष्ट्र की कल्पना से जोड़ दिया गया जबकि भारत के राष्ट्र की कल्पना बहुत अलग है।  भारत में कई आक्रमणकारी आये परंतु वे भारत की संस्कृति में विलीन हो गए।  पाश्चात्य नेशन की कल्पना EXclusiveness पर आधारित है जबकि भारतीय राष्ट्र की कल्पना Inclusivness पर आधारित है।  भारत के राजा, सेना, सेनापति तो हारे पर राष्ट्र दर्शन सदैव विजयी रहा क्योंकि हमारे राष्ट्र का आधार राजा नहीं था , संस्कृति भी आध्यात्मिकता थी सर्वसमंवयता का गन भारत का दर्शन है जो विश्व में अद्वितीय है , इस्लाम के आक्रमण के समय भी विभिन्न धर्मगुरु जैसे कबीर , नानकदेव, रैदास, तुलसीदास, 

समर्थ रामदास आदि के द्वारा हिंदुत्व का प्रचार प्रसार चलता रहा अर्थात राष्ट्र जीवित रहा अंग्रेजो के शासनकाल में भी महर्षि अरविन्द, स्वामीविवेकानंद, तिलक, बंकिमचंद चटोपाध्याय आदि के माध्यम से आध्यात्मिकता जीवित रही।  यह धरती हमारी माँ है यह दर्शन भी हमारे ऋषियों ने दिया ”माता भूमि पुत्रोहम पृथिव्या ”हमारे दर्शन में पृथ्वी का प्रत्येक अवयय पूजनीय है ( नदी, पर्वत, सरोवर, वृक्ष आदि।  और इन सबके पीछे भारत राष्ट्र का आधार हिन्दू है। उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह: कार्यवाह डॉ कृष्ण गोपाल जी ने मालवाप्रान्त के प्राध्यापको के तीन दिवसीय नेपुण्य वर्ग में इंदौर में कही।  

मालवा प्रान्त का  प्रांतीय प्राध्यापक नैपुण्य वर्ग दिनांक 5,6,7 अगस्त को इंदौर में संपन्न हुआ इस प्रांतीय प्राध्यापक नेपुण्य वर्ग में कुल 7 विभागों के प्रतिनिधित्व हुआ जिसमे 76 महाविद्यालयों से कुल 17 प्राचार्य / डायरेक्टर 16 रिसर्च कॉलर तथा कुल 188 प्राध्यापक उपस्तिथ थे इस तीन दिवसीय नैपुण्य वर्ग में राष्ट्र का गौरव, शिक्षक की भूमिका, भारतीय जीवन दर्शन आदि विषयो पर सत्र हुए एवं जिज्ञासा समाधान भी किया गया। 

 तीन दिवसीय वर्ग में मुख्य रूप से  क्षेत्रीय संघ चालक श्री अशोक जी सोहनी, प्रान्त संघ चालक डॉ प्रकाश जी शास्त्री, प्रान्त प्रचारक श्री पराग जी अभ्यंकर, सह प्रान्त प्रचारक डॉ श्रीकांत जी,सह प्रान्त कार्यवाह श्री विनीत नवाथे उपस्तिथ थे।