New Delhi April 09, 2017: “We want a law banning Cow Slaughter across the country. Any violence in the name of cow slaughter defames the cause, law must be obeyed,” said RSS Sarasanghachalak Dr Mohan Bhagwat in New Delhi.

RSS Sarasanghachalak Dr Mohan Bhagwat was addressing a ceremony on celebrating birth anniversary of Bhagavan Mahavir at Talkatora indoor stadium, New Delhi.

गौ रक्षा के दौरान कोई हिंसा न हो – डॉ. मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज एक कार्यक्रम में कहा, “गौ रक्षा के दौरान कोई हिंसा न हो. गौ रक्षकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस दौरान किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे, नहीं तो गौ रक्षा के तरीके पर ही सवाल उठने लगेंगे.”

श्री भागवत ने कहा, “गौ हत्या बंदी सरकार के अधीन है. हमारी इच्छा है कि पुरे भारतवर्ष के लिए कानून बने. इसके लिए केंद्र सरकार को एक कानून बनाना चाहिए.” उक्त विचार डॉ. भागवत ने दिल्ली के तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में भगवान महावीर जयंती महोत्सव महासमिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम महावीर जयंती महामहोत्सव के दौरान अपने संबोधन में कहा.

श्री भागवत ने कहा, “जैन धर्म हमें जीवों, प्राणियों और संपूर्ण श्रृष्टि की रक्षा करना, उनसे प्यार करना सिखाता है. अहिंसा की सीख देता है. हमें भगवान महावीर स्वामी के बताये हुए अहिंसा का मार्ग अपनाना होगा. तभी जाकर हम भारत को विश्व में एक मजबूत राष्ट्र बनाने में सफल हो पाएंगे.”

उन्होंने कहा, “अगर सभी नागरिक अहिंसा का पालन करना शुरू कर दें तो सारे भारतवर्ष में किसी भी प्रकार की हिंसा की घटना नहीं होगी. जैन धर्म के मूल में भी अहिंसा है. अहिंसा करुणा से ही आती है और करुणा धर्म का अभिवाज्य घटक है. हमें अपने अन्दर करुणा के भाव उत्पन्न करने होंगे.”

उन्होंने कहा, “अहिंसा का प्रचार अहिंसा का पालन करके ही करना पड़ेगा. किसी भी प्रकार की हिंसा भारतीय सभ्यता-संस्कृति में मान्य नहीं रही है. अहिंसा के आधार पर पूरा राष्ट्र एकजुट हो सकता है. इसलिए हमें मत और विचारों को मतभेद के नाते न देखते हुए मतभेदों को भुलाकर एकजुट होना है और राष्ट्र को मजूबत बनाना है.”

उन्होंने कहा, “अहिंसा का पालन करने से श्रृष्टि का रख-रखाव होता है. अहिंसा किसी भी धर्म का मूल भाव होता है. धर्म जोड़ने वाला होता है. जोड़ने का और जोड़कर उन्नत करने का प्रयास धार्मिक प्रयास है. जैन धर्म और इसके आचार्य हमें इस बात की सीख देते हैं.”