KANPUR December 18: जम्मू कश्मीर के अन्तिम राजा हरी सिंह ने जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय बिना शर्त किया था। लेकिन बाद में राजा हरी सिंह को जम्मू कश्मीर से निर्वासित कर दिया गया। उन्होंने अपनी अंतिम सांसें मुम्बई में लीं। इन सबका कारण कोई और नहीं बल्कि एक हिन्दू पं0 जवाहर लाल नेहरू थे। भाजपा से राज्य सभा सदस्य तरुण विजय ने ये विचार बी0एन0एस0डी0 शिक्षा निकेतन, कानपुर में जम्मू कश्मीर वर्तमान परिदृश्य और भावी दिशा नामक प्रबुद्ध जनगोष्ठी में दिये।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में 2 निशान 2 संविधान का विरोध करने वाले  श्यामाप्रसाद मुखर्जी की श्रीनगर में रहस्मय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। भारत की केन्द्र सरकारों में किसी ने भी इतना साहस नहीं दिखाया कि उनका कोई स्मारक श्रीनगर में बनवा सकें। जिस पर हम अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर सकें। इससे पहले भी 1675 में जब जम्मू कश्मीर के कृपा राम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मण्डल गुरु तेग बहादुर सिंह से मिलने गया और उनसे औरंगजेब के अत्याचारों से हिन्दुओं को बचाने का आग्रह किया। उस समय गुरु गोविन्द सिंह के कहने पर गुरु तेग बहादुर ने हिन्दुओं को बचाने के लिए अपने प्राण दिये। इतिहास हिन्दू महापुरुषों के बलिदानों से भरा पड़ा है।
जम्मू कश्मीर में क्षेत्रफल की दृष्टि से घाटी सिर्फ 10 प्रतिशत है। लेकिन राज्य में वहाँ से सबसे अधिक विधानसभा एवं लोकसभा सीटें हैं। यदि वहाँ कोई मुख्यमंत्री बनना चाहता है, तो उसे घाटी से और सुन्नी होना जरूरी है। जब कि शेष राज्य से सबसे अधिक राजस्व (85 प्रतिशत) प्राप्त होेता है। पं0 नेहरू ने जम्मू कश्मीर विलय के बाद शेख अब्दुल्ला को राज्य का प्रधानमंत्री बनाया। जब नेहरू को अपनी भूल का अंदाजा हुआ तो उन्हें शेख अब्दुल्ला को जेल में भेजना पड़ा। जब 1948 में जम्मू कश्मीर पर पाकिस्तानी सेनाओं ने हमला कर दिया था उस समय संसाधनों की कमी के बावजूद हमारी सेनाओं और संघ के स्वयंसेवकों के अथक परिश्रम और बलिदान से हमने उन्हें पीछे खदेड़ दिया था। लेकिन पं0 नेहरू ने तत्कालीन वायसराय के दबाव में युद्ध विराम की घोषणा की। जिसके कारण कश्मीर समस्या का समाधान होते-होते रह गया। हिन्दुओं पर होने वाले अत्याचारों को कहाँ पढ़ाया जाता है। इन सभी समस्याओं के लिए दिल्ली में बैठी केन्द्र सरकार जिम्मेदार है। जम्मू कश्मीर, नागालैण्ड और मणिपुर में स्पेशल आर्मफोर्स पावर एक्ट लागू है। जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपने राज्य से इसे हटाना चाहते हैं। गृहमंत्रालय का भी मानना है कि घाटी के जिन जिलों में अभी शान्ती है वहाँ से इस एक्ट को हटाया जा सकता है। किन्तु रक्षा मंत्रालय को इस पर आपत्ति है। सेना के कुछ अधिकारियों का मानना है कि सरकार को कोई भी निर्णय लेने से पहले इस बारे में सोचना चाहिए कि जहाँ आज शान्ती है उसका कारण क्या है ? इन इलाकों में सेना के कारण ही शान्ती आ पाना सम्भव हुआ है। 1994 में सभी दलों ने यह निर्णय लिया था कि गुलाम कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे भारत में मिलाना ही शेष है। लेकिन भारत के सर्वेक्षण विभाग के नक्शे से गुलाम कश्मीर गायब है। पिछले कई वर्षों में जहाँ भारत आधा हो गया है वहीं चीन दोगुना हो चुका है। आज चीन, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका सहित विभिन्न देशों में अपनी पैठ बना चुका है।


मुणिपुर में हिन्दी और हिन्दुस्तान का समर्थन नहीं किया जा सकता। मणिपुर की प्रमुख राजनीतिक पार्टी पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी है। चीन की सेना का नाम भी यही है। भारत के गृहमंत्रालय के अनुसार भारत में माओवादी सबसे शक्तिशाली विद्रोही, आतंकवादी संगठन 14 राज्यों में सर्वाधिक सक्रिय हैं। इन सभी बातों को जानकर मन में बहुत पीड़ा होती है। आज वोट बैंक के लिए कुछ लोगों ने देश को जाति, भाषा, प्रान्त में बाँट दिया है। ऐसे लोग जम्मू कश्मीर की समस्या का समाधान कैसे कर सकते हैं।
इससे पहले विषय प्रवर्तन करते हुए डा0 अरविन्द दीक्षित ने कहा कि जब महाराजा हरी सिंह ने जम्मू कश्मीर का भारत में विलय बिना किसी शर्त के किया था तो वहाँ धारा 370 लागू करने की क्या जरूरत थी। पाकिस्तान और चीन जम्मू कश्मीर को बफर स्टेट बनाना चाहते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डा0 ईश्वर चन्द्र गुप्त ने कहा कि जम्मू कश्मीर मुद्दे पर दिल्ली की सत्ता सहित सोए हुए लोगों को जगाने के लिए एक बड़े आन्दोलन की जरूरत है। अगर देश को बचाने के लिए बलिदान देने की बात आती है तो कानपुर कभी पीछे नहीं हटा है। अभी भी नहीं हटेगा।
कार्यक्रम का संचाचलन डा0 श्याम बाबू गुप्त ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से डा0 अशोक वाष्र्णेय, ज्ञानेन्द्र सचान, आनन्द जी, वासुदेव वासवानी आदि उपस्थित थे।