‘Performing the duty itself is Dharma’: RSS Sarasanghachalak Mohan Bhagwat at Haryana

Rohtak, Haryana March 29: ‘Performing one’s duty itself becomes Dharma. Values of Dharma is always permanent, even if the way of worship is changed. Dharma unites everyone ‘ said RSS Sarsanghachalak Mohan Bhagwat.

Dr Mohan Rao Bhagwat was addressing on a topic ‘Role of Hindutva ar the contemporary scenario’, at an intellectual meet organised by Sampark Vibhag of RSS Haryana Unit at Pandit Bhagwat Dayal Sharma Health University’s Auditorium in Rohtak.

IMG_7364

IMG_7337

रोहतक (विसंकें). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन जी भागवत ने कहा कि धर्म सभी के लिए कल्याणकारी होता है. धर्म हमेशा शाश्वत होता है. चाहे पूजा पद्धति कोई भी हो, धर्म जोडऩे का कार्य करता है. सबके जीवन की चिंता करते हुए अपने कर्तव्यों का धारण करना ही धर्म है.

सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने स्थानीय पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित चिकित्सक एवं प्राध्यापकों की गोष्ठी को संबोधित किया. गोष्ठी का विषय था वर्तमान परिवेश में हिंदुत्व की प्रासंगिकता.

उन्होंने कहा कि धर्म को संकुचित दायरे में बांधना ठीक नहीं है. देश, काल की परिस्थिति के अनुसार मूल्य और परिस्थितियां बदलती हैं. सत्य हमेशा रहता है. धर्म वह है, जिसके मूल में समभाव हो. महात्मा बुद्ध ने भी कहा कि धर्म सदा, सर्वदा सबके लिए कल्याणकारी होता है. बिना स्वार्थ के हम अपना जीवन सेवा व परोपकार  के दायरे में जीयें. प्रेम व कट्टरता के नाम पर संघर्ष नहीं होना चाहिए. सेवा, सहनशीलता, कृतज्ञता जैसे मूल्य हिंदुत्व की पहचान हैं. सेवा करते समय सीमाएं नहीं देखी जातीं.

उन्होंने कहा कि सनातन मूल्य आधारित संस्कृति पर सबका अधिकार है. भारत के दर्शन में आत्मीयता का भाव है. कभी भी भारतीय समाज आत्म केंद्रित नहीं रहा और न यह भारत की पहचान रही है. आत्मीयता में संघर्ष नहीं समन्वय होता है. इसी मान्यता व विरासत को भारतीयों को पहचानना चाहिए और अपनी विरासत पर गर्व करना चाहिए. विदेशी आक्रमण व भारतीय समाज को मूल से विस्मृत किए जाने के प्रयासों के चलते भारतीय समाज में कुछ कमजोरियां आईं. अब समाज के आचरण में मूल्य व बल दोनों को बढ़ाना पड़ेगा ताकि भारत को उत्कर्ष की राह पर पुन: ले जाया जा सके. यही एकमेव उपयुक्त विचार है जो विश्व को राह भी दिखाएगा.

भारतीय संस्कृति भेद व संघर्ष को नहीं मानती. हम समन्वय करके चलने वाले लोग हैं. इसी संस्कार की अभिव्यक्ति कि सभी का जीवन सुखी बने, ऐसी हमारी मान्यता रही है. यहां तक की प्रकृति के प्रति भी कृतज्ञता का भाव रखते हुए ही उसका दोहन करें, न कि शोषण करें. हमें भेद मिटाने होंगे. अपना इतिहास जानना होगा और अपना खोज करके सत्य सभी को बताना होगा. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि मैं भविष्य नहीं मानता, लेकिन मैं देख रहा हूं कि भारत भूमि फिर से विश्व का सिरमौर बन विश्व को राह दिखा रही है.

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ पुष्पेंद्र नाथ (निदेशक, अपोलो अस्पताल दिल्ली) ने कहा कि हिंदुत्व सेवा भावना और सहनशीलता की दिशा दिखाता है. उन्होंने सुश्रुत, भाई कन्हैयालाल आदि के जीवन के उदाहरण देते हुए कहा कि मनुष्य मात्र की सेवा ही भगवान की सच्ची सेवा है और चिकित्सक जगत में यह भाव होना चाहिए. विशिष्ट अतिथि डॉ. हरिश्चंद्र शर्मा ने वेदांत दर्शन के उदाहरणों से हिंदुत्व के विषय पर प्रकाश डाला.

Vishwa Samvada Kendra

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Are you Human? Enter the value below *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Next Post

ಡಾಕ್ಟರ್‌ಜಿಯವರ ಅಜ್ಞಾತ ಕ್ರಾಂತಿಜೀವನ : ಬಾಳಾಶಾಸ್ತ್ರಿ ಹರದಾಸ್

Mon Mar 30 , 2015
ಬಾಳಾಶಾಸ್ತ್ರಿ ಹರದಾಸ್ ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಸ್ವಯಂಸೇವಕ ಸಂಘದ ಆದ್ಯ ಸರಸಂಘಚಾಲಕ ದಿ. ಪೂಜ್ಯ ಡಾ. ಹೆಡಗೆವಾರ್ ಅವರ ಜೀವನದ ಹಲವು ಭಾಗಗಳು ಇಂದಿಗೂ ಅಜ್ಞಾತವಾಗಿ ತೆರೆಯಮರೆಯಲ್ಲಿವೆ. 1925 ರಲ್ಲಿ ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಸ್ವಯಂಸೇವಕ ಸಂಘದಂತಹ ರಾಷ್ಟ್ರ ನಿರ್ಮಾಣದ ಬಹು ಮೂಲಭೂತ ಸ್ವರೂಪದ ಕಾರ್ಯಕ್ಕೆ ತಮ್ಮ ಜೀವನವನ್ನು ಮುಡಿಪಾಗಿಡುವುದಕ್ಕೆ ಮುಂಚೆ ಅವರು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಅಂದೋಲನದ ಸರ್ವ ರೀತಿಯ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಿಗೂ ಕಾಲಿಟ್ಟಿದ್ದರು. ಅವರ ಆ ಜೀವನದ ಸ್ಥೂಲ ಇತಿಹಾಸವು ಸಾಮಾನ್ಯವಾಗಿ ಲಭ್ಯವಾಗಿದ್ದರೂ, ಅದರಲ್ಲಿನ ಎಷ್ಟೋ ಸೂಕ್ಷ್ಮಭಾಗಗಳು […]