Mumbai January 22, 2015: RSS Sahasarakaryavah Dr Krishna Gopal, Defence Minister Manohar Parikkar jointly launched ‘Rashtra Surakhsa’, a special magazine on National Security, published by popular Hindi Weekly Vivek at Mumbai on Thursday evening.

Dr Krishna Gopal Jan 22-2015

Thinker Ramesh Patange, MP Gopal Shetty and others attended the launching ceremony.

डा. आंबेडकर के समग्र जीवन का अध्ययन होणा जरुरी – कृष्णगोपाल

मुंबई, दि. २२ : डा. आंबेडकर की प्रतिमा को हमेशा संघर्षवादी की तरह पेश किया गया है | वस्तुत: वह समन्वय के समर्थक और क्रियाशील नेतृत्व भी थे | सामाजिक विज्ञान के अनेकानेक शाखाओं को उन्होने अपने चिंतनशील प्रज्ञा से उन्होने नयी दिशा दी | उनके जीवन के इन विविध पैलूओं का अध्ययन होना आवश्यक है, यह प्रतिपादन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह कृष्णगोपाल किया |

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‘हिंदी विवेक’ निर्मित ‘राष्ट्र सुरक्षा’ विशेषांक का विमोचन देश के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर तथा कृष्णगोपाल द्वारा मुंबई में हुआ | कार्यक्रम के विशेष अतिथी के रूप में ले.ज.(निवृत्त) दत्तात्रेय शेकटकर और सांसद गोपाल शेट्टी तथा हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था के अध्यक्ष रमेश पतंगे, प्रबंध संपादक दिलीप करम्बेंलकर और हिंदी विवेक के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी अमोल पेडणेकर मंच पर विराजमान थे |

रक्षा मंत्री पर्रीकर ने कहा, हाल ही में हुए नौदल ऑपरेशन के बाद पत्रकारो ने मेरे प्रतिक्रिया के लिए जंग जंग छेडा | उस ऑपरेशन के सत्यता पर भी प्रश्नचिन्ह उपस्थित किया गया | फ्रान्स में हुए आतंकी हमले का वार्तांकन करने वाले फ्रेन्च माध्यमोने अपनी जिम्मेदारी बखुबी निभाई | भारतीय माध्यमो ने इससे सबक लेने के जरुरत है | राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में हमने अधिक संवेदनशील होने की जरुरत है | सामाजिक स्वास्थ्य ध्यान में लेते हुए माध्यमो ने वृत्त देना चाहिए | किसी भी घटना को प्रस्तुत करते वक्त समाज में आक्रंदन की भावना निर्माण न हो, इसका खयाल रखना चाहिए | स्वनियमन से यह संभव हो सकता है |

कृष्णगोपाल ने कहा, डा. आंबेडकर ने अर्थशास्त्र, राज्यशास्त्र, नीतिशास्त्र, न्यायशास्त्र, मानववंशशास्त्र, धर्मविचार और इतिहास जैसे विषयो में सखोल अध्ययन कर राष्ट्रविचार के दृष्टी से इन शास्त्रो का उपयोग किया | समाज के उपेक्षित वर्ग को आत्मसन्मान और आत्मविश्वास देने का आंबेडकर का कार्य महानतम है | वह बिलकुल धर्मविरोधी नही थे | श्रद्धा, आस्था का वह सम्मान करते थे | उन्हे साम्यवादी की तौर पर पेश करना गलत है |