Lucknow March 28, 2016: RSS Sarasanghachalak Mohan Bhagwat inaugurated the new office building of Bharataiya Kisan Sangh, “Rajju Bhaiyya Smruti Bhavan” at Lucknow on Monday.

Lokarpan Karte Pujyneey Sarsanghchalak ji

The new building was named after Prof Rajendra Sing, was popularly called Rajju Bhaiyya, was the fourth Sarasanghachalak of RSS, serving as Chief of RSS from 1993 to 2000. Bharatiya Kisan Sangh is an RSS inspired organisation in the field of agriculture and fighting for justice and rights of farmer community.

Rajju Bhaiya Smrati Bhavan

The building was utilised as RSS karyalaya in 1948 by Rajju Bhaiyya. It was a residence for several RSS Pracharaks since then. In 1949, Rajju Bhaiyya along with the then prominent functionaries including Pandit Deendayal Upadhyaya, Nanai Deshmukh, Atal Bihari Vajapayee and others were working for the social cause residing at the same building. In 1951, Dr Shama Prasad Mukherjee founded Jan Sangh. He was residing in this office. The first ever Foundation Baitak of Jan Sangh was held in the same building. It was a provincial headquarters for the Jan Sangh for several years till 1979. Later, it was utilized as Karyalay of Bharatiya Kisan Sangh.  The building was utilised as editorial office o Organiser and Panchajanya. Even today, the LucknowLokasabha constitution address of Atal Bihari Vajapayee is with the same building. Hence, this building has immense contribution on upsurge of Sanghparivar organisations in Bharat.

Lokarpan karykram mein upasthiti logon ko sambhadhit karte sarsanghchalak ji

सरसंघचालक जी ने किया रज्जू भैय्या स्मृति भवन का लोकार्पण

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पूज्यनीय डा. मोहनराव भागवत जी ने सोमवार को लखनऊ में प्रो.राजेंद्र सिंह रज्जू भैय्या स्मृति भवन (भारतीय किसान संघ) कार्यालय का लोकार्पण किया।
इस अवसर पर पूज्यनीय सरसंघचालक जी ने कहा कि कृषि का विचार भारतीय दर्शन के आधार पर करना ही भारतीय किसान संघ की विशेषता है। साथ ही उन्होंने कहा अगर कार्य नहीं है तो कार्यलय का कोई मतलब नहीं है, कार्य का आलय ही कार्यलय है।

कार्यलय का इतिहास

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरसंघचालक प्रो0 राजेन्द्र सिंह उपाख्य रज्जू भैया के प्रयासों से 1948 में इस भवन का आवंटन हुआ था। तब से संघ कार्यालय के रूप में इसका उपयोग होने लगा। बाद में संघ के अनेक कार्यकर्ता और प्रचारक यहां आकर निवास करते थे। 1949 से रज्जू भैया के साथ पण्डित दीनदयाल उपाध्याय,नाना जी देशमुख, भाऊराव देवरस और अटल बिहारी बाजपेई ने इस भवन को केन्द्र मानकर संघ कार्य के माध्यम से राष्ट्र सेवा के कार्य में अपना योगदान किया।  इसी स्थान पर डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के श्रेष्ठ प्रचारकों के साथ लम्बे मंथन के बाद 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी। लगातार दो महीने तक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस कार्यालय में ठहरे थे। भारतीय जनसंघ की प्रथम स्थापना बैठक भी इसी कार्यालय में हुई थी। 1979 तक यहां जनसंघ का प्रान्तीय कार्यालय रहा। सन 1967 में संविद सरकार बनने पर जनसंघ का प्रदेश कार्यालय विधानसभा मार्ग पर हुआ और यह जनसंघ का महानगर कार्यालय बना रहा। 1979 में यहां किसान संघ का कार्यालय स्थापित हो गया।

राष्ट्रधर्म और पांचजन्य का संपादन भी इसी भवन से शुरू हुआ था। पण्डित दीनदयाल उपाध्याय यहीं पर कंपोजिंग करते थे और ट्रेडिंग मशीन से छापते थे। जनसंघ की स्थापना के बाद यह भवन जनसंघ कार्यालय के रूप में उपयोग होने लगा। इसके पहले इस भवन को संघ कार्यालय के रूप में जाना जाता था। पण्डित दीनदयाल उपाध्याय का केन्द्र दिल्ली होने तक इसी भवन में रहे। 1967 तक नानाजी देशमुख इसी भवन में रहे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई जब 1957 में सांसद हुए तब तक इसी भवन में रहे। अभी तक अटल बिहारी बाजपेई लखनऊ में मतदाता इसी भवन के पते से हैं।