RSS’s Dattatreya Hosabale, Dr Vaidya at launching of IPF journal PAKISTAN WATCH at Delhi

New Delhi June 13, 2016: RSS Sahsarakaryavah Dattreya Hosabale, RSS Akhil Bharatiya Prachar Pramukh Dr Manmohan Vaidya along with defence expert Maj Gen (rtd) GD Bakshi, Dr Rakesh Sinha jointly launched new trimonthly journal Pakistan Watch, at New Delhi on Monday evening.

Dattatreya Hosbale ji

Launch of Quarterly Journal -Pakistan Journal

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न होने के कारण पाकिस्तान में संस्कृति व्यवहार में नहीं आ पाई : दत्तात्रेय होसबले

13 जून, नई दिल्ली (इंविसंके). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबले ने आज भारत नीति प्रतिष्ठान के त्रैमासिक जर्नल “पाकिस्तान वॉच” का लोकार्पण किया. इस अवसर पर श्री होसबले ने बताया कि पाकिस्तान एक स्टेट नहीं है, बल्कि यह एक स्टेट ऑफ़ माइंड है. भारत की चिंता यह है कि वह हमारा पड़ोसी भी है. जब से पाकिस्तान का जन्म हुआ तब से लेकर आज तक कोई दिन ऐसा नहीं रहा जब पाकिस्तान की तरफ से भारत के लिए कुछ अच्छा किया गया हो. लाहौर की बस यात्रा की शुरुआत के 24 घंटों के भीतर उनकी तरफ से उल्टी प्रतिक्रिया आ गयी. पिछले साल 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री द्वारा पाकिस्तान से संबंध सुधारने के लिए की गयी अघोषित लाहौर यात्रा के बाद पठानकोट आतंकी हमले की घटना हो गयी. उन्होंने कहा कि उनसे संबंध सुधारने के प्रयास करना कोई गलत नहीं है लेकिन यह भी देखना चाहिए कि वहां के दूसरे पक्ष इसके लिए कितने इच्छुक हैं.

Pakistan Watch Book Release Program-13-6-2016 New Delhi Dattatreya Hosbale ji Speech Dr Manmohan Vaidya ji

श्री होसबले ने बताया कि समस्या पाकिस्तान की भारत विरोधी, हिन्दू विरोधी मानसिकता है, नफरत और द्वेष की आधार पर बना  पाकिस्तान एक राष्ट्र विहीन राज्य है. इतने वर्षों में भी वहां राष्ट्र भाव, सांस्कृतिक एकता का भाव विकसित नहीं हो पाया. इंस्टिट्यूट खड़े किये बिना कोई भी देश अपने लोगों का हित नहीं कर सकता, अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सकता, पाकिस्तान इंस्टिट्यूट्यूशन खड़े करने की दृष्टि से फेल हो गया. वहां की अर्थव्यवस्था का हाल भी हम जानते हैं. इतने वर्षों से मेनुफेक्चारिंग के क्षेत्र में कुछ नहीं किया सिवाय टेरररिस्ट के. अंतर्राष्ट्रीय जगत में इस कारण पाकिस्तान की साख नहीं बन पाई.

उन्होंने कहा कि भारत के साथ जब पाकिस्तान की तुलना करते हैं तो क्षेत्र और संसाधनों का अंतर बताया जाता है लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पाकिस्तान के समकक्ष कई देश स्वतंत्र हुए, आज वह देश पाकिस्तान से कहीं आगे हैं. इसके लिए पाकिस्तान खुद जिम्मेदार है, उसने सही दिशा में प्रयास नहीं किये. पाकिस्तान में नीति निर्धारण जनप्रतिनिधियों के स्थान पर मिलिट्री और मौलवियों की हाथों में होने के कारण वहां देश की नीतियां भारत और हिन्दू विरोध के नकारात्मक आधार पर तय होती हैं, उसी चश्में से वहां हर चीज देखी जाती है इस कारण वहां कुछ सार्थक काम नहीं हो पाया.

श्री होसबले ने कहा कि फिर भी पाकिस्तान के साथ हमारा संबंध, बातचीत रहनी चाहिए. हम दुनिया के अन्य देशों की तरह नहीं सोच सकते. भौगोलिक दृष्टि से हमारा उनके साथ संबंध है, एक ही सभ्यता, संस्कृति से हम जुड़े रहे हैं. भारतीय संस्कृति में राज्य को कभी भी रिलीजियस स्टेट नहीं बनाया गया और पाकिस्तान का जन्म रिलीजियस स्टेट के आधार पर होने की कारण उनसे हमारा सांस्कृतिक संबंध टूट गया. उन्होंने उनकी सांस्कृतिक विरासत को नाकारा है, उनको अपनी सभ्यता और संस्कृति याद है, लेकिन वहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता न होने के कारण वह उसे व्यवहार में नहीं ला पा रहे हैं, यही उनकी समस्या है. भारत के कुछ लोगों की शुभकामनाओं से पाकिस्तान का कुछ भला नहीं होने वाला, उनका भला होगा उनके कृतित्व से, अच्छे सकारात्मक विचारों से, उनको ऐसी बुद्धि आए ऐसी शुभकामनाएँ हम दे सकते हैं.

भारत नीति प्रतिष्ठान के मानद निदेशक प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा कि पाकिस्तान एक राष्ट्र विहीन राज्य है. जब पाकिस्तान बनाने का विचार आया तब भी वह एक एक्सपेरिमेंट था और आज भी वह प्रयोग जारी है. यह भारत का नैतिक जिम्मेदारी है कि हम वहां के घटनाक्रम पर नजर रखें. इसी जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए भारत नीति प्रतिष्ठान ने ‘पाकिस्तान वाच’ त्रैमासिक जर्नल के जरिए उसके हर अंक में पाकिस्तान से जुड़े ऐतिहासिक डाक्यूमेंट्स को सामने लाने का निश्चय किया है. जैसे पहले अंक में हमने पाकिस्तान की संविधान सभा के मेम्बर और मंत्री रहे जेएन मंडल ऐतहासिक इस्तीफ़ा छापा है, जो उन्होंने विभाजन के बाद पाकिस्तान में हिन्दुओं के दमन का विरोध करते हुए दिया था. इसमें काउंटर टेरररिज्म पर हाल ही में आई पाक की पालिसी का भी विश्लेषण है, तहरीक-ए-तालिबान पर लेख के साथ ‘माइनोरिटी इन पाकिस्तान’ पर भी लेख है.

श्री अजय कुमार ने बताया कि हम अपने मित्र तो बदल सकते हैं लेकिन पड़ोसी नहीं, इसलिए पड़ोसी देशों के प्रति संबंधों में ज्यादा सतर्कता आवश्यक है. पाकिस्तान में एंटी इंडिया सेंटीमेंट्स को बढ़ावा देना वहां के नेताओं की राजनीतिक जरूरत है, हमें इसे ध्यान में रखकर पाकिस्तान के संबंध में नीति बनाकर चलने की आवश्यकता है. भारत ने पिछले 2 सालों में पश्चिम एशिया और कभी पाकिस्तान के सबसे विश्वस्त देश ईरान से बहुत अच्छे संबंध बना लिए हैं. भारत को दुनिया से सामने पूरी दुनिया के लिए समस्या बन चके पाकिस्तान को अपनी कूटनीति से भी टैकल करना होगा.

श्री विवेक काटजू ने बताया कि 2011 में अमेरिका द्वारा ऐबटाबाद में किया हमला पाकिस्तान के लिए स्तब्ध करने वाली घटना थी, इतने सालों तक भ्रम में रहा अमेरिका भी अब पाकिस्तान का चरित्र जान गया है. इतने सालों तक अपनी फ़ौज के संरक्षण में रखने के बाद साफ़ मना करना कि उन्हें दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी की कोई जानकारी नहीं थी, यह पाकिस्तान की ईमानदारी पर प्रश्नचिन्ह लगता है. इस कारण अमेरिका ने एफ-16 विमान पाकिस्तान को देने से मना कर दिया है. पाकिस्तान में वहां के नेता भारत शत्रु है और रहेगा इसी धारणा पर अपनी सभी नीतियां बनाते हैं, यह ध्यान में रखकर हम अपनी नीतियां निर्माण करने तो बेहतर होगा. पाक प्रतिनिधिमंडल को भारत में हुर्रियत के नेताओं से मिलने पर रोक लगाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस दृष्टि से एक अच्छा फैसला था.

से.नि. मेजर जनरल श्री जी.डी. बक्शी ने अपने सैन्य अंदाज में कहा कि पाकिस्तान सिर्फ फ़ौजी भाषा ही समझता है, सभ्य भाषा नहीं. भारतीय सेना यह सत्य जानती है. आज पाकिस्तान और चीन का गठजोड़ उत्तेजित करने वाला कदम है, दूसरी ओर अमेरिका उससे दूर होता जा रहा है उसे एफ -16 देने से मन कर दिया है, भारत को इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए. इस समय पाकिस्तान में फ़ौज पूरी तरह हावी हो चुकी है और नवाज शरीफ नैपथ्य में चले गए हैं. इसलिये पाकिस्तान से कोई भी वार्ता करने से सोचने से पहले भारत को पूर्व के अनुभवों को ध्यान करने की जरूरत है. पाकिस्तान से शांति का समय केवल 1971 के बाद का 9 साल कालखंड था जब भारतीय फ़ौज ने पाकिस्तान का मानमर्दन किया था, उसके बाद 9 साल तक वह हिम्मत नहीं भारत के खिलाफ आँख उठाने की हिम्मत नहीं जुटा सका.

भारत नीति प्रतिष्ठान द्वारा प्रकाशित होने वाली पाक्षिक पत्रिका “उर्दू प्रेस की समीक्षा और विश्लेषण” के संकलनकर्ता और अनुवादाक वरिष्ठ पत्रकार श्री मनमोहन शर्मा को इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. मनमोहन वैद्य द्वारा सम्मानित किया गया.

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